BBMB Approves Water Release

धान सीजन से पहले पंजाब, हरियाणा और राजस्थान को बड़ी राहत, BBMB ने मंजूर की अतिरिक्त पानी की मांग

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BBMB Approves Water Release

धान रोपाई के महत्वपूर्ण सीजन के बीच पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। Bhakra Beas Management Board (बीबीएमबी) ने सिंचाई जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तीनों राज्यों के लिए पानी जारी करने की मंजूरी दे दी है। यह फैसला मंगलवार को चंडीगढ़ स्थित बीबीएमबी मुख्यालय में चेयरमैन Manoj Tripathi की अध्यक्षता में आयोजित तकनीकी समिति (टीसीएम) की बैठक में लिया गया।

बैठक के दौरान साझेदार राज्यों ने अपनी-अपनी जल आवश्यकताओं को समिति के समक्ष रखा। पंजाब ने 25,000 क्यूसेक, हरियाणा ने 10,000 क्यूसेक और राजस्थान ने 12,500 क्यूसेक पानी की मांग की। विस्तृत चर्चा के बाद बीबीएमबी ने तीनों राज्यों की मांग को मंजूरी देते हुए अगली तकनीकी समिति की बैठक तक इसी मात्रा में पानी उपलब्ध करवाने का निर्णय लिया।

बीबीएमबी के अनुसार इस बार पानी की आपूर्ति भाखड़ा और पोंग दोनों जलाशयों से की जाएगी। हालांकि, भाखड़ा डैम से अपेक्षाकृत अधिक और पोंग डैम से कम पानी छोड़े जाने की संभावना है। इसके पीछे मुख्य उद्देश्य भाखड़ा जलाशय के जलस्तर को नियंत्रित करना और आगामी मानसून तथा बर्फ पिघलने से आने वाले अतिरिक्त पानी के भंडारण के लिए पर्याप्त जगह सुनिश्चित करना है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्तमान में भाखड़ा जलाशय का जलस्तर 1578.07 फीट दर्ज किया गया है, जो इसके पूर्ण जलाशय स्तर (FRL) 1680 फीट से लगभग 102 फीट कम है। वहीं पोंग जलाशय का जलस्तर 1328.34 फीट है, जबकि इसका पूर्ण जलाशय स्तर 1400 फीट निर्धारित है।

पंजाब को बीबीएमबी प्रणाली के तहत रोपड़ हैडवर्क्स और हरिके बैराज से पानी उपलब्ध कराया जाता है। रोपड़ हैडवर्क्स पर पंजाब और हरियाणा के बीच जल वितरण किया जाता है, जबकि हरिके बैराज से पंजाब और राजस्थान को पानी दिया जाता है। हरिके से छोड़े जाने वाले पानी में राजस्थान की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत अधिक रहती है।

बीबीएमबी ने स्पष्ट किया है कि 30 जून 2026 को होने वाली अगली तकनीकी समिति की बैठक में जलाशयों की स्थिति, मानसूनी परिस्थितियों और राज्यों की सिंचाई जरूरतों की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद आगे की जल आपूर्ति और वितरण को लेकर नया निर्णय लिया जाएगा।

धान रोपाई के व्यस्त दौर में लिया गया यह फैसला तीनों राज्यों के लाखों किसानों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। इससे सिंचाई की उपलब्धता सुनिश्चित होगी और खरीफ फसलों की बुवाई एवं रोपाई कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।